ब्रिटिश महाबोधि परिषद



ब्रिटिश महाबोधि परिषद

ब्रिटिश महाबोधि परिषद (BMBS) का उद्भव भी उसी दिन हुआ, जिस दिन ‘बुडिस्ट मिशन’ आरंभ हुआ। वह लंदन बौद्ध विहार का पूर्ववर्ती रूप था और उनका उद्घाटन 24 जुलाई 1926 को हुआ। ‘बौद्ध धर्म के सिद्धांतों के ज्ञान की वृद्धि करना, लंदन में विहार की स्थापना करना और पाश्चात्य जगत में बौद्ध धर्म का प्रचार-प्रसार करना’ उसके उद्देश्य थे।

अनागारिक धर्मपाल, श्रीमती मेरि रॉबिन्सन फोस्टर और ब्रिटेन में थाई राजदूत मौलिक संरक्षक थे। 1934 में BMBS ने यूरोप में बौद्ध-धर्मियों के सबसे बड़े जन-समूह को एकत्रित कर लिया। वह ‘यूरोपीय बौद्ध कांग्रेस’ था।

1985 में या उसके आसपास विहार के ज्येष्ठ भिक्षु और उनके गृहस्थ-सहयोगी के बीच में हुए तीव्र मतभेद ने BMBS में बड़ी दरार पैदा कर दी। एक ज्येष्ठ भिक्षु और उनके गृहस्थ-सहयोगी जो BMBS के सदस्य भी थे, उन्होंने विहार-भवन के लिए दावा किया। यह विवाद अदालत तक पहुँचा। कानूनी कार्यवाही जो मार्च 1986 में शुरू हुई, 1991 की ग्रीष्म ऋतु में समाप्त हुई। उसके अनुसार ब्रिटेन के उच्च न्यायालय ने अनागारिक धर्मपाल संगठन एवं उसके संरक्षक न्यासी श्री लंका के सार्वजनिक न्यासी के पक्ष में फैसला सुनाया। फैसले से विहार के अधिकार के संबंध में ज्येष्ठ भिक्षु और उनके गृहस्थ-सहयोगी के दावों को खारिज़ कर दिया गया।

मुक़द्दमे के कारण BMBS का पर्याप्त पतन हुआ लेकिन अब नये संविधान और अनागारिक धर्मपाल संगठन के संरक्षण के साथ उसका पुनरुत्थान हुआ है। उसका मुख्यालय लंदन बौद्ध विहार में है।



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भिक्षु गल्कंदे धम्मनंद - धर्म, अधिकार एवं समाधान :
संघर्ष के बाद संसाधन की खोज



ब्रिटिश महाबोधि परिषद के निदेशक :

सुधम्मिक हेवावितारण
रजिव हेवावितारण
सिंह रत्नतुंग
सुदंत अबेकोन
अमल अबेवर्धन – सचिव
निहाल वीरसेन