अपनी मातृभाषा सिंहली में तथा अंग्रेज़ी भाषा में एक प्रचुर लेखक, संपादक, प्रकाशक के साथ-साथ एक वाग्मितापूर्ण सुवक्ता के रूप में, अनागारिक धर्मपाल ने पुस्तिकाएँ, डायरी प्रविष्टियाँ, पत्र, समाचार पत्र लेख एवं भाषण आदि विधाओं के लेखों का एक विशिष्ट संग्रह तैयार किया है। इनमें से अधिकांश लेखों को सुरक्षित रखा गया है और वे जनता के लिए सुगम्य हैं।
अनागारिक धर्मपाल अपने पूरे व्यस्क जीवन में स्मरण पुस्तकें एवं डायरियाँ लिखते रहे और इनमें से अधिकांश एक सदी से भी अधिक समय से सुरक्षित रहे हैं। मूल हस्तलिखित डायरियाँ महाबोधि संग के द्वारा श्री लंका के राष्ट्रीय अभिलेखागार विभाग को प्रदान की गयी थीं, जबकि उनकी स्मरण पुस्तकों को सारानाथ में स्थित धर्मपाल संग्रहालय में रखा गया है। अनागारिक धर्मपाल संगठन, कॉलंबो में संगठन के कार्यालय में स्थापित अपने पुस्तकालय में निम्नलिखित डायरियों तथा स्मरण पुस्तकों की प्रतिलिपियों (कुछ सॉफ्ट प्रति के रूप में) के समुच्चय का अनुरक्षण करता है।
डायरी लेख अप्रैल/मई 1889 : कर्नल एच. एस. ओलकॉट के साथ जापान की यात्रा के संबंध में
डायरी नोट 1889 : आर्य अष्टांगिक मार्ग के संबंध में
डायरी लेख सितंबर 1913 : हांगकांग में ब्रिटीश के संबंध में
डायरी लेख सितंबर/अक्तूबर 1913 : हरिश्चंद्र वलिसिंह की मृत्यु के संबंध में
डायरी लेख दिसंबर 1913 : धम्म की साधना करने के संबंध में
डायरी लेख दिसंबर 1931 : मूलगंध कुटी विहार को पूरा करने के लिए देवों से रक्षा की प्रार्थना करने के संबंध में