परिवार

Anagarika Dharmapala’s Youngest Brother

चार्ल्स हेवावितारण

(1876 से 1929 तक)

चार्ल्स, अनागारिक धर्मपाल का सबसे छोटा भाई था। वह एक विद्वता, मानव-प्रेमी, उद्योगपति, स्वतंत्रता सेनानी था और सिलोन चिकित्सा महाविद्यालय में चिकित्साशास्त्र की पढ़ाई करके सिलोन की चिकित्सा सेवा में शामिल हो गये। चार्ल्स ने संयुक्त राज्य के लंदन विश्वविद्यालय से ऍल. आर. सी. पी. (लंदन) और एफ़. आर. सी. एस. उपाधियाँ प्राप्त की, जहाँ पर उसने अपनी शिक्षा में विशिष्टता दिखायी और कई विषयों में अपने काम के लिए पदक भी जीते। चार्ल्स सिलोन यूनिवर्सिटि कॉलेज परिषद का सदस्य था। उसके स्मरणार्थ में प्रतिवर्ष कई स्मृति पुरस्कार प्रदान किये जाते हैं। जैसे : रोयल कॉलेज में जहाँ उसने पढ़ाई की (तत्कालीन कॉलंबो अकादमी), कॉलंबो विश्वविद्यालय में भौतिक विज्ञान तथा संस्कृत के लिए और पेरादेणिय विश्वविद्यालय के विज्ञान संकाय में भौतिक विज्ञान के लिए।

वह अपने भाइयों के साथ बौद्ध पुनरुद्धार आंदोलन में सक्रिय रूप में शामिल था और अपने नाना के द्वारा अनुदत्त विद्योदय परिवेण कॉलेज में वह न्यासी भी था। 1915 के दंगों के बाद उसके भाई एडमंड, डी. इस. सेनानायक, डी. आर. विजेवर्धन के साथ उसे हिरासत में लिया गया और बाद में रिहा कर दिया गया।

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डॉ. चार्ल्स अल्विस हेवावितारण अपने बेटे, विमलधर्म और वेल्स के राजकुमार के साथ, 1921 में राजकुमार की श्री लंका-यात्रा के दौरान।

देश के औद्योगिक आंदोलन के अग्रणी के रूप में, वह वर्तमान कॉलंबो फोर्ट रेलवे स्टेशन के निर्माण में सहायता देने वाले प्रमुख औद्योगपतियों में से एक था। इस स्टेशन का उद्घाटन 1917 में कॉलंबो के लिए एक नये केंद्रीय स्टेशन के रूप में किया गया था, जो इंग्लैंड के मॅनचेस्टर विक्टोरिया स्टेशन के समान एक शानदार इमारत थी। बेर सरोवर से पुनःप्राप्त ज़मीन पर यह स्टेशन बनाया गया था। वह 1921 में वेल्स के राजकुमार की सिलोन-यात्रा के दौरान आयोजित औद्योगिक प्रदर्शनी के आयोजन समिति का अध्यक्ष भी था और प्रदर्शनी के दौर पर राजकुमार के संग-साथ था। यह कविता ('At Thy Feet' शीर्षक से अंग्रेज़ी में लिखी गयी थी) चार्ल्स ने तब लिखी थी, जब 1915 में उसे जेल में डाल दिया गया था। यह बुद्ध जी और आर्य अष्टांगिक मार्ग के प्रति उसकी हार्दिक भक्ति को दर्शाती है।

आपके चरणों में
डॉ. चार्ल्स हेवावितारण

हे दया की मूर्ति! अटूट लक्ष्य से आपने
देखा था उत्तान-पतन असंख्य लोकवासी के
जन्म के चक्र ने क्या दिये उन सबको
रुकिए, सत्य को पहचानें हमारे हित के लिए
सत्य तो दुख और वजह की तुलना के परे है
उसके पथ की समाप्ति होने जा रही है,
दिखाया आपने शांति एवं व्यस्त जीवन बिताएँ कैसे
अष्टांगिक मार्ग की सीढ़ियों के बीच
जो तृष्णा को बुझाकर परमानंद की ओर चलाएँ।
नमन करूँ मैं आपको, सत्य के गुरु जो हैं-
नम्रमुख, सविनय, सादर ह्रदय के साथ
आपकी पूजा करूँगा मेरे आनंद लेकर
पूरी तरह से; किया जिन्होंने क्षणिक आनंद का अस्वीकार
हम तो निस्सहाय थे, आपके पूर्वजों के विचार से
अब हम चकते हैं, रस आपकी वाणी के
हमें बढ़ावा दें, जो यह जीवन-चक्र चलाते रहते
जिन्हें नहीं मालूम था पहले, चलाएँगे कहाँ और कैसे
हे मेरे भगवान! सिर नीचा करके आपका नमन करूँ मैं
आपके पैरों तले गिरकर, तीन बार लगातार
अवश्य रहूँ मैं आपकी शरण के विश्वास में, जीवनभर।

1929 में चार्ल्स की मृत्यु हो गयी, जब अहलियगॉड के सड़क-रेलमार्ग के चौराहे पर एक रेलगाड़ी आकर उनकी गाड़ी से टकरा गयी। यह इलाका सिलोन के मशहूर रत्नो के लिए जाना जाता है और वहाँ पर मध्य-विकसित चाय के बागान भी हैं। वह सिलोन की पहली मोटरकार-रेलगाड़ी दुर्घटना थी। इस दुर्घटना के बाद ही सिलोन में रेल फाटक लगाये गये। अपने भाई के क्षत-विक्षत देह को देखकर अनागारिक धर्मपाल ने दुःख से रोते हुए और विलाप करते हुए कहा था कि, "ओ मेरे भाई, मेरे चिकित्सक, तुम्हारे साथ ऐसा क्यों हुआ?"